बाल चिकित्सालय में महिला और उसके परिजनों के साथ साठीयो ने की मारपीट, मरीजों की सुरक्षा को लेकर उठे सवाल, पुलिस ने पीड़ित का आवेदन लेकर रवाना कर दिया
रतलाम के बाल चिकित्सालय में एक महिला और उसके परिजनों के साथ साठीयों ने जमकर मारपीट की और उत्पात मचाया, यही नहीं महिला को दर्जनभर साठीये सीढ़ियों से घसीट कर भी ले गए और लात घुसो से मारपीट भी की। इसके साथ ही यहां बाल चिकित्सालय में मरीजों ओर उनके परिजनों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो गए वहीं इन सब के बीच पुलिस की भूमिका भी काफी गैर जिम्मेदार नजर आई। क्योंकि पीड़ित जब थाने पहुंचे तो वहां पर उनका आवेदन लेकर उन्हें रवाना कर दिया गया है वहीं अब पीड़ित पक्ष के अंदर भय का वातावरण बना हुआ है। ओर पुलिस में शायद उत्पाती साठीयो का खौफ है ईसीलिए वे इनपे कोई कार्यवाही नहीं करना चाहते।
दरअसल मामला गुरुवार दोपहर का है जहां बाल चिकित्सालय में नागदा निवासी दिनेश सोनगरा जो कि वर्तमान में रतलाम के अर्जुन नगर में निवास कर रहा है। जो कि अपने बेटे को करीब 6 दिन से बाल चिकित्सालय में भर्ती कर रखा है। जहां उसका इलाज चल रहा है। वही आज हनुमान जयंती के उपलक्ष में वे प्रसाद लेकर वापस बाल चिकित्सालय लौटे थे। जहां पार्किंग में रसीद काटने वाले से उसकी किसी बात को लेकर कहा सुनी हो गई। और इसके साथ पार्किंग वाले और उसके अन्य साथियों ने पीड़ित के साथ विवाद किया। इसके बाद अंदर जाकर भी पार्किंग में काम करने वाले ओर इसी क्षेत्र में रहने वाले करीब एक दर्जन से ज्यादा साठीये अस्पताल में पहुंच गए और युवक ओर उसकी पत्नी से विवाद करते हुए मारपीट करने लगे। इस दौरान पीड़ित की पत्नी के साथ भी जमकर लात घुसो से मारपीट की और सीढ़ियों से घसीट कर ले गए और जमकर मारपीट की। जिसका वीडियो भी काफी वायरल हो रहा है। इसके साथ ही यहां पर सवाल अब बात चिकित्सालय में मरीज और उनके परिजनों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़ा हो रहा है। क्योंकि यहां पर खुलेआम मारपीट हो जाती है लेकिन यहां पर सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं है। इसके साथ ही यहां पर पुलिस कार्यालय अभी गैर जिम्मेदाराना रहा क्योंकि यहां पर पीढ़ीत जब अपनी फरियाद लेकर स्टेशन रोड थाने पहुंचे तो वहां पर उन्हें बैठाए रखा और आवेदन लेकर उन्हें रवाना कर दिया और कोई कार्रवाई नहीं की।
वही इन सबके बीच बड़ा सवाल ये हे कि बाल चिकित्सालय में बड़े स्तर पर साठीयो का कब्जा है। साल और यहां पर बाल चिकित्सालय और mch के एक गेट को बंद कर कब्जा किया हुआ है। इसके साथ ही यहां पर संदिग्ध गतिविधियां भी संचालित होती है जिसको लेकर यहां पर अस्पताल में काम करने वाला स्टाफ भी काफी परेशान है और यहां पर मरीज ओर उनके परिजनों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता है रहती है। वही पुलिस और जिला प्रशासन का रवैया भी गैर जिम्मेदाराना रहता है।
