3 महीने भी नहीं टिक पाया रेलवे स्टेशन का नया प्लेटफॉर्म, पहली बारिश में खुली घटिया निर्माण की पोल, रेलवे अधिकारियों ने उड़ाया गुणवत्ता का मखोल, जिम्मेदार डाल रहे घटिया निर्माण पर पर्दा
रतलाम। देश के प्रमुख रेलवे स्टेशनों में शुमार रतलाम जंक्शन पर करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया नया प्लेटफॉर्म नंबर 8 शुरू होने से पहले ही घटिया निर्माण की भेंट चढ़ गया है। यहाँ कुछ दिन पहले या महीने पहले बना प्लेटफॉर्म पहली बारिश भी नहीं झेल पाया ओर कई जगह से पेवर ब्लॉक और फर्श उखड़ गए हैं, जबकि कई स्थानों पर प्लेटफॉर्म नीचे बैठ गया है। इसके कारण पानी भरने की स्थिति भी बन रही है। वही इस घटिया निर्माण से रेलवे मजबूती वाले विकास के दावों की पोल भी खुल गई हे। रेलवे अपने आप में मजबूत निर्माण के लिए जाना जाता हे लेकिन निर्माण कम्पनी ओर जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत इस तरह का भ्रष्टाचार कर रेलवे का नाम खराब कर दिया गया है। यह नया प्लेटफॉर्म प्लेटफॉर्म नंबर 7 से जुड़कर बनाया गया है और जल्द ही यात्रियों के लिए शुरू होने वाला था। लेकिन निर्माण की गुणवत्ता पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रेलवे अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत से घटिया निर्माण किया गया, जिसकी पोल पहली ही बारिश में खुल गई। वही इस मामले में जिम्मेदारो का कहना है कि कोई भी निर्माण होता हे तो बारिश में मिट्टी नीचे चली जाती है, जिसे ठीक करवाया जा रहा है।

वही ठेकेदार कंपनी KTPL द्वारा क्षतिग्रस्त हिस्सों को दोबारा ठीक करने का काम शुरू कर दिया गया है। आरोप है कि निर्माण की खामियों को छिपाने के लिए मरम्मत कराई जा रही है, जबकि जिम्मेदारों ओर निर्माण कंपनी पर कार्रवाई नहीं हो रही।

सूत्रों का कहना है कि मार्च 2026 के आख़री सप्ताह में सीआरएस निरीक्षण हुआ था। ओर वर्क्स का फिट सर्टिफिकेट देने की बात भी सामने आई थी। जिसके बाद इसे रेलवे ने हैण्डओवर कर प्लेटफॉर्म को अधीन किया था। वह जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार द्वारा इस घटिया निर्माण पर पर्दा डालते हुए, हैंडओवर नहीं करने के बात कहते हुए, निर्माण को गुणवत्ता वाला बताया गया ओर मामूली सा खराब होना कहकर ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों का बचाव करते नजर आये।

गौरतलब है कि रेलवे को कभी मजबूत और गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्यों के लिए जाना जाता था, लेकिन रतलाम मंडल में ही इस घटना ने रेलवे इंजीनियरिंग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वही लोगो का कहना है कि ये घटिया निर्माण रेलवे DRM अश्विनी कुमार के कार्यकाल का सबसे खराब बताया रहा है। जिसमें रतलाम मंडल की छवि खराब हो रही है।

इस मामले में संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने और पूरे निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि अभी से ऐसी स्थिति है तो भविष्य में यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।
उल्लेखनीय है कि रतलाम मंडल देश के बेहतर रेलवे मंडलों में गिना जाता है, लेकिन नए प्लेटफॉर्म की यह स्थिति रेलवे की छवि पर भी सवाल खड़े कर रही है। अब सभी की निगाहें रेलवे प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।

बता दें कि इससे पहले रेलवे कॉलोनी में इंजीनियरिंग विभाग के जिम्मे सीसी रोड निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जमकर धज्जियां उड़ाई गई थी। बगैर ज़मीन खुदाई के सीमेंट सड़क बना दी गई है।

